Bhari baris me kabhi

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भारी बारिश में कभी ठंडी हवाओ में रहा
एक तेरा ज़िक्र था जो मेरी सदाओं में रहा
कितने लोगो से मेरे अच्छे रिश्ते थे
मगर तेरा ज़िक्र ही सिर्फ मेरी दुआओं में रहा

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